अब हम भी वही किस्सा दुहराने लगे है !
खौफ खा कर जी हजुरी लगाने लगे हैं !!
इनकी तरफदारी न की तो याद रखना ,
इसी घाट पर कितने ठिकाने लगे हैं !!
कौन कहता सच जीने मरने के लिए है
जाननेवाले भी इसे आज छुपाने लगे हैं !!
उजाला हो गया बहुत इनकी नजर में ,
जलता दिया भी ये लोग बुझाने लगे हैं !!
खतरनाक ही नहीं वहशी भी हैं ये लोग
घाव जहाँ है वही छुरा भी घुसाने लगे हैं !!
डरा नहीं मैं बस सावधान कर रहा तुमको
हर किसी के सामने ऐसे मंज़र आने लगे हैं !!
और कुछ हो जाये तुमसे जवानी के जोश में
आज दोस्त भी दोस्त से हाथ छुड़ाने लगे हैं !!
बोलना तो गुनाह था पहले भी यहाँ पर यारों
चुप भी रहे तो छाछठ की धारा लगाने लगे हैं !!
कुछ दीवाने लोग भी है इस मुल्क में “पंकज”
इसी वक़्त मशाल उठाके जो गीत गाने लगे हैं !!